My Mother at Sixty Six Detailed Summary in Hindi

इस कविता में कवयित्री एक निजी अनुभव का वर्णन करती है । इसके द्वारा वह  मानवीय संबंधों का एक साधारण विरोधाभास व्यक्त करती है । कई बार हम किसी के प्रति गहरी सहानुभूति  अनुभव करते हैं किंतु हम इसे उपयुक्त ढंग से व्यक्त नहीं कर पाते ।

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शुक्रवार की  प्रातः थी। कवयित्री अपने माता पिता के घर से कोचीन के हवाई अड्डे को जा रही  थी। उसकी मां कार में उसके बगल में बैठी हुई थ। मां की आयु  तब 66 वर्ष थी । जाते हुए कवित्री ने मां की तरफ देखने के लिए  सिर घुमाया | उसने देखा की मां ऊँघ रही थी और उसका मुंह खुला हुआ था | उसका चेहरा उतना ही पीला था जितना किसी मृत व्यक्ति का | कवयित्री को पीड़ापूर्ण अनुभव हुआ कि उसकी मां अधिक देर जीवित नहीं रहेगी | किंतु फिर शीघ्र ही उसने इस पीड़ाजनक विचार को अपने मन से निकाल दिया | उसने सड़क किनारे उगे छोटे छोटे पेड़ों को देखना शुरू कर दिया जो  तेज भागते हुए प्रतीत हो रहे थे । उसने बच्चों को अपने घरों से बाहर खुशी में भागते हुए देखा ।

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हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद कवयित्री ने सुरक्षा जांच करवाई । उसकी मां कुछ दूर बाहर खड़ी थी । सुरक्षा जांच के बाद कवयित्री ने उतनी दूर से फिर अपनी मां की तरफ देखा । मां का चेहरा पीली सफेदी लिए हुए था । यह उतना ही पीला लग रहा था जितना पीला शीत ऋतु के अंतिम दिनों में चांद प्रतीत होता है । कवयित्री को अपने शरीर में एक पुरानी जानी पहचानी पीड़ा सी महसूस हुई । यह उसी तरह की थी जैसी वह अपने बचपन में महसूस किया करती थी जब उस पर कोई भय छा जाता था । फिर भी उसने अपनी मां से कोई शब्द ना कहा । केवल जो बात उसने कहीं यह थी‌‌  — ” मम्मी , तुम्हें फिर दोबारा जल्द मिलूंगी ” । केवल एक काम जो कवित्री ने किया है वह यह था कि वह मुस्कुराती रही और मुस्कुराती रही ।

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